मेरा नाम उमेश है। मैं 21 साल का हूँ, छह फुट लंबा, और मुझे देखने में अच्छा लगता है। मैं जिम जाता हूँ और मेरी बॉडी फिट रहती है। मेरा चेहरा साफ है और मेरी आँखें गहरी हैं। मेरा लंड छह इंच लंबा और मोटा है। मैं Rajasthan के Kota जिले में रहता हूँ।
मेरी मामी, जिनका नाम Rena है, 33 साल की हैं। उनका रंग बिल्कुल गोरा है, उनका फिगर 36-28-38 है, और उनकी चूचियाँ इतनी बड़ी हैं कि हाथ में बिल्कुल नहीं आतीं। उनकी गांड गोल और रसीली है, और जब वो चलती हैं तो उनकी कमर का लचक देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए। मेरे मामा, संजय, 35 साल के हैं और दुबई में जॉब करते हैं, इसलिए साल में सिर्फ एक-दो बार घर आते हैं। वो थोड़े गंभीर स्वभाव के हैं, लेकिन मामी के साथ उनकी बनती है। ये कहानी मेरे और मेरी मामी के बीच की एक सच्ची और मसालेदार घटना है, जो मेरे कॉलेज के दिनों में हुई।

यह बात उस समय की है जब मैं कॉलेज के पहले साल में था। मैं अपनी पढ़ाई के लिए मामा के घर Kota में रहता था। उनका घर बड़ा और आरामदायक था, दो मंजिला, जिसमें ऊपर मेरा कमरा था। मेरे हार्मोन्स उस उम्र में उफान पर थे। किसी भी आकर्षक लड़की को देखते ही मेरा दिल धड़कने लगता था। लेकिन मेरी सारी चाहतें मेरी मामी के लिए थीं। उनकी एक मुस्कान ही मेरे दिल को छू लेती थी। कभी-कभी, मैं सोचता था कि शायद एक दिन मैं उनके साथ उस तरह का रिश्ता बना सकूँ, लेकिन मैं डरता था कि शायद वो मेरे मामा को बता दें। फिर भी, उनके साथ होते हुए मेरे दिमाग में बार-बार वो ख्याल आता था कि उनकी मोमबत्तियों को दबाऊं, उनकी चुचियाँ चूसूं, और उन्हें बेड पर पटककर चोदूँ।
दोपहर का समय था। मैं अपने कमरे में बैठकर अपनी किताब खोलकर पढ़ने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मेरा ध्यान बार-बार भटक रहा था। मेरी मामी मेरे पास फर्श पर बैठकर चावल साफ कर रही थीं। वो पतली साड़ी पहनी हुई थीं और मैं उनके आकर्षक शरीर की ओर देख रहा था। तभी मामी ने मुझसे पूछा, “तुम्हें Movie देखना पसंद है?” उनकी आवाज़ में जोर था। मैंने जवाब दिया, “हाँ, मुझे Movie देखना पसंद है, लेकिन टाइम कहाँ मिलेगा?” उन्होंने मुस्कान के साथ कहा, “तुम्हें कैसी Movie’s पसंद हैं?” मैंने हँसते हुए कहा, “कोई भी चलेगी, सभी पसंद हैं। और आपको कैसी Movie पसंद हैं?”
आँखों में थोड़ी चमक के साथ उन्होंने कहा, “मुझे रोमांटिक और सेक्सी फिल्में पसंद हैं, जिनमें बहुत सारा सेक्स हो।” मैंने उनकी बात सुनकर होश खो दिए। मेरे पैंट्स में मेरा लंड खड़ा हो गया। मुझे लगा जैसे वह मुझे बुला रही हों। मैंने मासूमियत का नाटक करते हुए पूछा, “Mami, Sex Movie क्या होती है? मुझे तो कुछ पता नहीं।” वो हँसी और बोली, “अरे, झूठ मत बोल, उमेश! तुझे सब पता है।” मैंने फिर मासूमियत का नाटक करते हुए कहा, “सच में, मामी, मुझे नहीं पता। आप ही बताओ ना।” वो चटखारे लेते हुए बोलीं, “अच्छा, पहले पढ़ाई पूरी कर, फ
मैंने मन ही मन सोचा कि ये एक अच्छा मौका है। अगर अब छोड़ दिया तो शायद कभी नहीं मिलेगा। लेकिन मुझे डर भी था। अगर मामी ने मना कर दिया या मामा को बता दिया तो मेरा इज्जत गवा देने का खतरा था। हालांकि, मैंने तय किया कि मैं मौके का इस्तेमाल करके आगे आगे बढ़ाऊँगा।
मेरे बकायादा दिन बाद मेरा सौभाग्य बदला। मेरे परिवार में एक बूढ़ी नानी रहती थी, जो अचानक बीमार पड़ गई थी। मामा और बाकी लोग उन्हें देखने गाँव चले गए और घर पर सिर्फ मैं और मामी रह गए। मैं शाम 6 बजे कोचिंग से लौटा और मन में उथल-पुथल थी। मैं सोच रहा था कि कैसे मामी से सेक्स की बात शुरू करूँ। क्या वो सच में चुदवाना चाहती हैं, या बस मज़ाक कर रही थीं? ‘मेरे दिमाग में सवालों का बहुत बड़ा तूफान चल रहा था।
शाम के सात बजे मामी ने मुझसे बुलाया, “उमेश, खाना बन गया है, आ जाओ!” मैं खाने की मेज पर पहुंचा। मामी ने हल्की सी नाइटी पहनी थी, जो उनके शरीर से चिपकी हुई थी। उनकी चाती और पीठ का उभार साफ दिख रहा था। हम दोनों साथ में खाना खा रहे थे। खाने के बीच में मैंने हिम्मत जुटाकर कहा, “मामी, अब तो घर पर कोई नहीं है। अब बताओ ना, ये Sex Movie क्या होती है?” वो हँसते हुए बोलीं, “अरे, इतनी जल्दी क्या है? पहले खाना तो खत्म कर, फिर कमरे में जा। मैं आती हूँ।”
मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था। मैंने जल्दी-जल्दी खाना खाया, हाथ धोया, और अपने कमरे में चला गया। मैं बेड पर लेट गया और सोने का नाटक करने लगा। मन में बहुत सोच रहा था। क्या मामी सच में आएँगी? क्या वो मुझे चोदने देंगी? करीब 30 मिनट बाद मामी कमरे में आईं। वो एक पतली, पारदर्शी नाइटी में थीं, जिसमें से उनकी ब्रा और पैंटी साफ दिख रही थी। वो मेरे पास आकर बेड पर लेट गईं। उनकी खुशबू से मेरा लंड और सख्त हो गया।
मैं चुप रहा था, लेकिन मेरे शरीर में गर्मी बढ़ रही थी। मैंने अपना एक पैर उनकी जाँघ पर रख दिया और उनकी चूचियों पर अपना हाथ रखा। उनकी आवाज़ में एक अजीब सी नरमी थी और वे पूछीं, “क्या बात है, उमेश? नींद नहीं आ रही?” मैंने हकलाते हुए कहा, “न-नहीं, मामी।”
उसने हँसते हुए कहा, “तुम मेरा दूध पी लो, शायद तुम्हें नींद आ जाए।” उनकी बात सुनकर मैं हैरान रह गया। फिर मैंने बिना वक्त गँवाए उनकी नाइटी ऊपर की और उनकी ब्रा खोल दी। उनकी गोरी, भरी-भरी चूचियाँ मेरे सामने थीं। उनके निप्पल गुलाबी और सख्त थे। मैं पागलों की तरह उनकी चूचियों को चूसने लगा। “आह्ह… उमेश, धीरे… ओह्ह… कितना मज़ा आ रहा है,” वह सिसकियाँ ले रही थी। मैं कभी उनकी चूचियों को चूसता, कभी उन्हें कसकर दबाता।
वह पूरी तरह से उत्तेजित थी। उनकी साँसें तेज थीं और उनकी चूत से गर्माहट मेरे हाथ तक महसूस हो रही थी। उन्होंने कहा, “चल, तो तुझे सेक्स के बारे में कुछ पता भी नहीं है? आज मैं तुझे सब सिखा दूंगी।” मैंने कहा, “हाँ, रानी जी। आज तुम मेरी पत्नी हो।” वह हंस पड़ी और बोली, “हाँ, Aaj मैं तेरी रानी हूं। अब मुझे चोद दे, उमेश।”
उसने अपनी नाइटी उतार दी और वो मेरे सामने नंगी थी। उसकी चूत गुलाबी, रसीली और हल्की गीली थी। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया और वो अपनी आहें भर रही थी। मैं उसकी चूत और निप्पल्स को चाटता रहा। उसकी चूत से गर्म पानी निकलने लगा और मैंने उसकी चूत को साफ कर दिया। उसका पानी नमकीन और मज़ेदार था।
फिर उसने कहा, “अब अपनी अंडरवियर उतार।” मैंने जल्दी से अपनी पैंट और अंडरवियर उतार दी। मेरा लंड अब 8 इंच का हो चुका था, एकदम सॉलिड। उसने मेरा लंड देखा और कहा, “हाय दईया, इतना मोटा लंड! ये तो मेरी चूत को फाड़ देगा!” उसने मेरा लंड पकड़कर चूसना शुरू कर दिया। “उम्म… तेरा लंड तो बहुत टेस्टी है, उमेश… और चूसूँ?” वह गंदी बातें करते हुए मेरा लंड चूस रही थी। मैं बहुत खुश था। लगभग 15 मिनट तक उसने मेरा लंड चूसा और मैं बार-बार झड़ने की कगार पर था।
उसके बाद उन्होंने कहा, “जाओ, मेरी चूत में अपना लंड डालो।” मैंने बिना देर किए उनकी तंग में अपना मोटा लंड एक ही झटके में डाल दिया।”आह… ठीक है, धीरे… धीरे और जोर से!” उन्होंने चीखा। । उसके Mama उनसे 2 साल से चुदाई नहीं कर रहे थे, इसलिए उनकी चूत थाणी हुई थी। मैंने धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई। “धपाधप… धपाधप…” मेरे लंड की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। उसकी चूचियाँ उछल रही थीं। “आह… ओह… ठीक है, चोद मुझे… और ज़ोर से!” वो चिल्ला रही थीं। मैं उसकी चूचियों को कसकर दबा रहा था, कभी उनके निप्पल्स को चूसता।
मेरी चुदाई के लगभग 20 मिनट बाद मेरा वीर्य निकलने वाला था। मैंने पूछा, “रानी जी, मुझसे निकलने वाला है। कहाँ छोड़ दूँ?” उन्होंने कहा, “अंदर ही छोड़ दो, मैंने ऑपरेशन करा लिया है।” मैंने सभी वीर्य उनकी चूत में छोड़ दिया और वीर्यावरण को पहुंच गया। मेरी सांसें तेज़ थीं, लेकिन मेरा मन अभी भरा नहीं था।
मैनें कहा, “रानी जी, अब मैं तुम्हारी गांड मारूँगा।” उन्होंने घबराकर कहा, “नहीं, उमेश, गांड में बहुत दर्द होगा। मैंने पहले कभी नहीं किया।” मैनें ज़िद की, “प्लीज़, रानी जी, बस एक बार। मैं धीरे करूँगा।” थोड़ी देर ना-नुकुर के बाद वो मान गई। मैनें उन्हें घोड़ी बनाया, अपनी थूक से उनकी गांड का छेद गीला किया, और एक ज़ोरदार झटका मारा। मेरा आधा लंड उनकी गांड में घुस गया। “आआह्ह… उमेश, निकाल… बहुत दर्द हो रहा है
मैंने उनके चिल्लाहटों को नजरअंदाज करके पूरा लंड उनकी गांड में घुसा दिया। “घपाघप… घपाघप…” मैं उनकी गांड मारता रहा। “आह्ह… ओह्ह… उमेश, तूने मेरी गांड फाड़ दी… धीरे कर, बदमाश!” वो चिल्ला रही थी। मैंने उनका मुँह दबा लिया और जोरदार चुदाई करता रहा। थोड़ी देर बाद मैं फिर झड़ गया और सारा माल उनक
उसने दर्द से कराह रही थी। मैं उसके पास लेट गया। दर्द ठीक होने लगा। मैंने पूछा, “रानी जी, मज़ा आया?” उसने हंसते हुए कहा, “आया, लेकिन तूने मेरी गांड फाड़ दी।” रात भर हमने बारह बार चुदाई की। सुबह तक हम थककर सो गए।
मैं जब सुबह उठा, तो मामी चाय बना रही थीं। वो मुझसे मुस्कुरा कर बोलीं, “तूने रात को कमाल किया।” मैं शरमाते हुए बोला, “आप भी तो कमाल की थीं, रानी जी।” उस दिन के बाद हमारा रिश्ता और गहरा हो गया। हम चुदाई का मज़ा लेते, लेकिन हम सावधान रहते कि किसी को पता ना चले।
दोस्तों, मेरी कहानी कैसी लगी? क्या आपने भी ऐसा हॉट अनुभव किया है? नीचे कमेंट में अपनी राय जरूर दें। आपकी कहानियां भी सुनना चाहूंगा। अगली बार फिर मिलते हैं एक नई मसालेदार कहानी के साथ। नमस्ते।