मित्रों, यह कहानी मेरे, यानी राजू गोयल, और मेरी जीव विज्ञान शिक्षिका के बीच हुई एक सच्ची और गरम घटना पर आधारित है, जो मेरे दिल-ओ-दिमाग में हमेशा के लिए बस गई है। मैं, लक्ष्य, बचपन से ही चुच्चे का दीवाना रहा हूँ। रात-रात भर मुठ मारकर अपनी आग बुझाता था, लेकिन मन में हमेशा एक असली चुदाई का ख्वाब पलता था। मेरी क्लास में एक जीव विज्ञान शिक्षिका थीं, जिनका नाम मैं नहीं लूंगा, क्योंकि उनकी इज्जत मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वो

मुझे इतनी पसंद थीं कि उनका ख्याल मेरे दिल से निकलता ही नहीं था।
उसकी आयु लगभग 25 साल थी। उसका फिगर बहुत खतरनाक था – गोरी त्वचा, लम्बी लंबाई, बड़े रसीले स्तन, पतली कमर, और एक आकर्षक गांड, जो किसी को भी पागल कर सकती थी। जब वह स्कूल में चलती थी, तो हर लड़के का ध्यान उस पर जाता था। उसका आकर्षण सिर्फ छात्रों तक ही सीमित नहीं था, शिक्षक भी उसके प्रशंसक थे। स्कूल के बाहर भी उसके प्रशंसकों की लाइन लगी रहती थी। उसके आसपास के लोग उसे नजरंदाज करते रहते थे, लेकिन वह सभी को नजरंदाज करती थी। मैं, लक्ष्य, भी उस पर लाइन मारता था। उसकी याद में रात-रात भर मुठ मारता, चुदाई के सपने देखता, और स्कूल में उसके पीरियड का इंतजार सुबह से ही शुरू हो जाता।
मेरी आंखें उनके चेहरे से हटती ही नहीं थीं। जब उनकी आंखें मेरी आंखों से मिलतीं, तो मेरा दिल थम जाता था। जब वो स्कूल नहीं आती थीं, तो मेरा मन उदास हो जाता था। फिर नवंबर में स्कूल की अर्धवार्षिक परीक्षा हो गई थी, और जब रिजल्ट आया तो मैं बायोलॉजी में फेल हो गया था। मैडम ने मुझसे कहा कि मैं अपने माता-पिता के साथ आना। मैं अपने पापा के साथ पेरेंट्स-टीचर मीटिंग में गया। उस दिन मैडम काली साड़ी पहनी थीं, और बहुत खूबसूरत लग रही थीं! मैं पास खड़ा था, और पापा मैडम से बात कर रहे थे। मैडम ने पापा को बताया कि मैं क्लास में ठीक से पढ़ाई नहीं करता, मेरा ध्यान हमेशा खोया रहता है। मैंने मन ही मन सोचा, “जान, मेरा ध्यान तो सिर्फ तुम पर रहता है।”
पिताजी बोले कि मेडम, उन्हें थोड़ा सज़ा देना चाहिए। लेकिन मेडम ने कहा, “अब वे जवान हो गए हैं, उन्हें क्यों मारना? अगर वे ऐसे ही पढ़ाई नहीं करेंगे, तो बोर्ड की परीक्षा में फेल हो जाएंगे।” पापा ने मेडम से निजी ट्यूशन के बारे में बात की, पर मेडम ने इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे अपने ससुराल में रहती हैं, और उनके परिवार निजी ट्यूशन की अनुमति नहीं देगा। पापा ने फिर से विनंती की, तो मेडम मान गईं। उन्होंने कहा, “ठीक है, कल से लक्ष्य को ठीक 5 बजे मेरे घर भेज दीजिए।” मैं ये सुनकर इतना खुश हुआ कि मन ही मन उछल पड़ा। लेकिन घर पहुंचते ही पापा ने मेरे साथ डांटा दी और कहा, “लक्ष्य, थोड़ा ध्यान से पढ़ाई करो।”
Maine papa se vaada kiya aur agle din hi hero bankar madam ke ghar pahunch gaya. Maine darwaja bajaya, to madam ke sasur ji ne gate khola. Main andar gaya aur chupchaap baith gaya. Kuch der intezaar ke baad bhi madam nahi aayi. Shayad vo kisi kaam mein vyast thi. Ghar mein unki saas aur unka do saal ka beta bhi tha, jo madam jitna hi cute tha. Main us room mein akela baitha madam ka intezaar kar raha tha.
मेडम थोड़ी देर बाद आईं। जब मैंने उन्हें देखा, तो मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। हमारे पास वो दिन रूम में थे जहाँ सिर्फ मैं और मेडम थे; बाकी सब दूसरे रूम में थे। मेडम ने मुझे पढ़ाना शुरू किया, पर मेरा ध्यान उनके पढाई पर नहीं, बल्कि उनके हुस्न पर था। वो मुझे डांटतीतीं, “लक्ष्य, मुझ पर कम ध्यान दो और पढ़ाई पर फोकस करो।” कभी-कभी वो मेरा हाथ पकड़कर लिखने को कहेतीं, और उनके बूब्स मेरे हाथ को छू जाते। समय-समय पर वो थप्पड़ लगाने की जगह मेरे गाल पर हाथ फेर देतीं, और उनके छूने से मेरे जिस्म में आग सी लग जाती।
ऐसे ही दिन बीत रहे थे। जब मैं घर पहुंचा, तो मैंने उनकी याद में मुठ मारी। एक दिन जब मैं उनके घर पहुंचा, तो मैडम ने खुद गेट खोला। वह लाल साड़ी और टाइट ब्लाउज में थीं। उनके उभरे हुए बाल और बूब्स देखकर मैं गेट पर ही ठिठक गया। मैडम ने हंसकर कहा, “अरे लक्ष्य, अब अंदर भी आओगे या यहीं खड़े रहोगे?” मैं अंदर गया और पूछा, “मैडम, अंकल-आंटी कहाँ हैं?” उन्होंने बताया कि सब बाहर गए हैं, और उनके पति भी साथ थे। यह सुनकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे, आज शायद मौका मिले।
मैडम ने पढ़ाई शुरू की, लेकिन मैं उनकी सुंदरता में खो गया था। उन्होंने मुझसे कहा, “लक्ष्य, तुम कहाँ खोए हो? पढ़ाई नहीं करनी?” मैंने जवाब दिया, “मैडम, आज मूड नहीं है।” उन्होंने कहा, “ठीक है, नक्शा बनाओ।” उसी वक्त उनके बेटे मॉन्टू रोने लगा। मैडम ने कहा, “तुम नक्शा बनाओ, मैं मॉन्टू को देखती हूँ।” मैंने 10 मिनटों में नक्शा बना लिया और उनके कक्ष में दिखाने गया। वहां मैडम मॉन्टू को दूध पिला रही थीं। उनकी बबड़े-बड़े बूब्स देखकर मैं हरामी हो गया
मैडम ने मुझसे कहा, “लक्ष्य, तुम्हारी तमीज़ नहीं है।” मैंने सॉरी कहा लेकिन मेरा सब्र खत्म हो गया था। मैंने कहा, “मैडम, मैं आपका दीवाना हूँ और आपको बहुत प्यार करता हूँ।” ये सुनकर मैडम परेशान हो गईं और मेरी आंखों से आंसू निकल आए। मैं दूसरे रूम में जा रहा था जब मैडम ने मुझसे कहा, “रुको लक्ष्य, मेरी बात सुनो।”
मैं रुक गया और वहाँ खड़ा था। मैडम ने मेरा हाथ पकड़ा और मैंने उसके हाथ में चुहने से मेरा हाथ कांपने लगा। फिर उन्होंने मुझे अपने बेडरूम में ले गई, जहां मॉन्टू आराम से सो रहा था। वहन मैंने उसकी बातों को सुनी और शर्मिंदा हो गया। मैं तब 18 साल का था, अब कानूनी उम्र में था।
मैडम ने पूछा, “क्या तुम मुझे वास्तव में पसंद करते हो?” मैंने हां कहा और सिर हिलाया। उन्होंने कहा, “मेरी आंखों में देखो।” मैंने हिम्मत जुटाकर देखा और मुस्कुराया। फिर मैडम ने मेरे गाल पर किस किया और कहा, “मेरे हॉट स्टूडेंट।” मैं मन ही मन उछल पड़ा। मैंने भी उनके गाल पर किस किया। मैडम ने हंसकर पूछा, “लक्ष्य, क्या तुम वर्जिन हो?” मैंने शर्माते हुए उत्तर दिया, “हां।”
“आपकी हंसी निकली और वो बोलीं, “तुम इतने उत्तेजित क्यों हो रहे हो। आज मैं तुम्हें संभोग की शिक्षा देती हूँ। पर वादा करो, यह बात किसी को नहीं बताओगे।” मैंने स्वीकार किया। उन्होनें धीरे-धीरे अपनी साड़ी उतारी। उनके सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थीं। उनके स्तन टाइट ब्लाउज में और भी उभरे हुए लग रहे थे। मैंने उन्हें दबाने की कोशिश की, पर उन्होंने मुझे रोका और कहा, “अभी नहीं, ये दूध है। पीना चाहोगे?” मैंने उत्साह से कहा, “हां, बिल्कुल।”
श्रीमती ने ब्लाउज और ब्रा उतार कर दी। उनके बड़े-बड़े, गोरे स्तन मेरे सामने थे, जिनके निप्पल गुलाबी और सख्त थे। मैं वहां परिवेशित हो गया। उनके स्तनों को दबाया, चूसा, और उनका दूध पिया। श्रीमती मेरे सिर पर हाथ फेर रही थीं और सिसकियां ले रही थीं, “आह्ह्ह… उफ्फ्फ… लक्ष्य, ऐसे ही चूसो।” उनकी आवाज से मेरे शरीर में तीव्र उत्तेजना थी। उन्होंने मेरी पैंट के ऊपर से मेरा लंड पकड़ लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगीं। मेरा लंड, जो करीब 7 इंच लंबा और मोटा था, पूरा तन गया। श्रीमती ने कहा, “लक्ष्य, तुम्हारा लंड तो तलवार जैसा है।”
मैंने कहा, “मैडम, यह सिर्फ और सिर्फ आपका है। आप मेरी पहली महिला हैं।” मैडम ने हंसते हुए प्रतिक्रिया दी। फिर वे मेरे पास आईं और मेरे लिंग को चूसने लगीं। उनका गर्म मुंह मेरे लिंग पर था और वे उसे चूस रही थीं जैसे कोई लॉलीपॉप हो। मैं सिसकियां ले रहा था, “आह्ह… मैडम… उफ्फ्फ…” उनका चूसना इतना जोरदार था।
कुछ समय बाद, महोदय लेट आ गईं और उन्होंने कहा, “लक्ष्य, अब मेरी चाटो।” मुझे पहले थोड़ा अजीब लगा, क्योंकि मैंने ब्लूफिल्म्स में तो देखा था, लेकिन असल में कभी नहीं किया था। महोदय ने पूछा, “क्या बात है?” मैंने कहा, “कुछ नहीं।” मैंने उनकी गीली, गुलाबी चाट पर हाथ फेरा। वो इतनी गर्म थी कि मेरे हाथ में करंट सा लगा। मैंने उनके पैरों के बीच बैठकर धीरे-धीरे उनकी चाट पर जीभ फेरने लगा। उन्होंने अपने पैर और फैलाए और चाट को हाथ से खोलकर कहा, “हां, यहीं चाटो, मेरे राजा। इसका मजा लो।”
जैसे ही मेरी जीभ उनकी चूत पर रही, मुझे वहाँ नमकीन और क्रीमी स्वाद मिला। पहले यह अपरिचित लगा, लेकिन फिर मजा आने लगा। मैंने उनकी चूत को पूरी तरह से चाटा। मेडम चिल्ला रही थीं, “आह्ह… उह्ह्ह… और जोर से चाटो, लक्ष्य!” मैंने उनकी चूत में जीभ डाली और उसे अंदर-बाहर करने लगा। मेडम सिसकियों के साथ मेरा सिर उसकी चूत में दबाती रहीं, “हां… और जोर से… आह्ह्ह…”
मेरा लंड अब प्रफुल्लित हो गया था। महोदया ने कहा, “लक्ष्य, अब डाल दीजिए, लेकिन सावधानी से।” मैंने उनका पेटीकोट ऊपर किया और उनकी योनि के मुंह पर लंड सरसराया। महोदया सिसकियां ले रही थीं, “उफ्फ्फ… लक्ष्य, सावधानी से…” मैंने हल्का सा धक्का दिया, और मेरे लंड का शीर्ष उनकी योनि में चला गया। महोदया ने जोर से चिल्लाया, “आह्ह्ह!” मेरी भी गांड फट गई, क्योंकि उनकी योनि इतनी गर्म और टाइट थी कि मेरा लंड जलने लगा। मैंने सावधानी से धक्के मारे, और हर धक्के के साथ महोदया की सिसकियां तेज होती गई
फिर मैंने एक मजबूत धक्का मारा और मेरा पूरा लंड उनकी योनि में जड़ गया। मैडम चिल्लाईं, “आह…मार डाला!” मैंने धक्के मारना शुरू किया और हर धक्के के साथ उनकी योनि की गर्मी मेरे लंड को और गर्म कर रही थी। “थप-थप-थप” की आवाज कमरे में गूंज रही थी। मैडम नीचे से अपनी पिछवाड़ा उछाल रही थीं और चिल्ला रही थीं, “हां…और जोर से…चोदो मुझे, लक्ष्य!” मैंने उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारे।
“कुछ ही समय में महोदया किनारे पर पहुंच गईं। उनकी सांसें तेज हो गईं, “आह… उह… मैं गई!” मैं भी जल्दी झड़ने वाला था। मैंने कहा, “महोदया, मैं भी…” और हम दोनों एक साथ झड़ गए। महोदया ने मुझे मजबूती से पकड़ लिया और कहा, “लक्ष्य, मुझे पकड़ो, वरना मैं उड़ जाऊंगी।” मैंने उन्हें मजबूती से गले लगाया। पसीने से हम दोनों तर थे।
थोड़ी देर बाद मेडम ने मुझसे गोदी में बिठाया और मुझे किस किया। उन्होंने कहा, “लक्ष्य, मैं तुम्हारी दीवानी हो गई हूँ। तुम मेरे पति के बाद पहले मर्द हो, जिसके साथ मैंने ये किया।” मैं बहुत खुश था। उस दिन मैंने उनकी तीन बार और चुदाई की। मैंने हर बार उनकी चूत को अलग-अलग तरीके से चोदा। कभी वो मेरे ऊपर आईं, कभी मैं उनके ऊपर। उनकी सिसकियां और “थप-थप” की आवाजें कमरे में गूंजती रहीं। रात हो चुकी थी, और मुझे घर जाना था। मेडम ने बताया कि उनके घरवाले चार दिनों के लिए बाहर गए हुए हैं। मैंने उनकी अनुमति जमकर चुदाई की।
प्रिय साथियों, आपको यह कहानी कैसी लगी? क्या आपने कभी अपनी मनोरंजकता के लिए ऐसे विचार किए हैं कि आपने हॉट टीचर के साथ फंतासी जी है?